Question

कटकटान कपि कुंजर भारी। दुहु भुजदंड तमकि महिमारी।। डोलत धरनि सभापद खसे चले भाजि भय मारूत ग्रसे।। प्रस्तुत पंक्तियों के रचयिता कौन हैं? –

A तुलसीदास
B सूरदास
C जायसी
D रसखान
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