Question
(1) संसार में किसी का भी जीवन स्थायी नहीं है। (य) महान् से महान् व्यक्ति और शक्तिशाली प्रतिभाओं का भी अन्त सुनिश्चित है। (र) इस संसार में तन का घमण्ड व्यर्थ है, क्योंकि देहावसान होता ही है। (ल) जीवन दो दिन का मेला है। (व) जो उजड़ जाता है। धन के वैभव पर इठलाना किस काम का, (6) क्योंकि धन दौलत की शान एक दिन समाप्त हो जाती है।
निम्नलिखित प्रश्नों में दिए गए अनुच्छेदों के पहले और अन्तिम वाक्यों को क्रमश: (1) और (6) की संज्ञा दी गई है। इसके मध्यवर्ती वाक्यों को चार भागों में बाँटकर (य), (र), (ल), (व) की संज्ञा दी गई है। ये चारों वाक्य व्यवस्थित क्रम में नहीं हैं। इन्हें ध्यान से पढ़कर दिए गए विकल्पों में से उचित क्रम चुनिए, जिससे सही अनुच्छेद का निर्माण हो।
More व्याकरण Questions
- 'जिन खोजा तिन पाइया गहरे पानी पैठ' का सही अर्थ क्या है?
- निम्न में से अल्पप्राण वर्ण कौन से हैं ?
- अपवाद को छोड़कर वर्णमाला के अक्षरों के नाम किस लिंग में होते हैं?
- श्याम आज तक उसको हरा नहीं पाया, मोटे काले लिखे गए शब्द को पहचानिये?
- सूची- I को सूची – II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
- निम्नलिखित में कौन सा वाक्य शुद्ध है
- एक की वर्तनी शुद्ध है।
- ' पराजय ' किसका विलोम शब्द है ?
- एक की वर्तनी शुद्ध है।
- 'पाण्डु' शब्द विशेषण की दृष्टि से है-
Relevant for Exams:
Hey! Ask a query
Please enter email id
The email must be a valid email address.
Please enter Mobile Number
Please enter valid Mobile Number
Please enter your Doubt